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Wednesday, December 14, 2011
Tuesday, December 13, 2011
जिम्मेदारी .......
जिम्मेदारी.....!! सुनने, पढने और लिखने में एक छोटा सा शब्द....पर वास्तव में इसी एक शब्द में छिपा है सबकी सफलता का राज.... !! जब भी हमसे परिवार, समाज या कंपनी में कोई गलती हो जाती है तो कहा जाता है कि "जिम्मेदारी से काम करना सीखो"...मतलब साफ़ है कि दिनभर से लेकर, पूरे सालभर, पूरी जिंदगीभर इस शब्द का बहूत ही गहरा सम्बन्ध हर व्यक्ति विशेष से होता है....जैसे कि
१. अगर कोई मजदूर निर्धारित समय में उपयुक्त उत्पादन न दे पाए तो कहते है की उसने जिम्मेदारी से मजदूरी नहीं की.
२. अगर कोई विधार्थी साल भर पढने के बाद फेल हो जाए तो कहते है की उसने जिम्मेदारी से पढाई नहीं की,
३. अगर किन्ही पति - पत्नी में अनबन है तो कहा जाता है की दोनों ने वैवाहिक रिश्ते की जिम्मेदारी पूरी तरह नहीं निभायी.
४. अगर बच्चा बिगड़ जाए तो माप बाप को कहा जाता है की उन्होंने जिम्मेदारी पूरी नहीं निभायी.
मतलब हर कदम पर हर असफलता के लिए जिम्मेदारी को ही प्रधान माना गया है....लेकिन क्या हमने कभी सोचा कि आखिर "जिम्मेदारी" का वास्तविक मूल कहाँ से शुरू होता है....इसकी जडें कहाँ है....!! अगर गहराई से निगांह दौडाई जाए तो महसूस होता है आज हर कोई ढेरसारी जिम्मेदारिय निभा रहा है...कोई देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने की बता करता है....कोई बच्चो के प्रति....कोई समाज के प्रति...कोई दोस्तों के प्रति...कोई कंपनी के प्रति.....पर शायद ही 1 लाख में से 1 व्यक्ति ये सोचता हो की इन् सब जिम्मेदारियों से पहले हर इंसान की खुद के प्रति जिम्मेदारियां है, जिन्हें ईमानदारी से निभाने के बाद ही किसी अन्य जिम्मेदारी के साथ उचित न्याय किया जा सकता है...!! युग ऋषि की उपाधि से सम्मानित पं. श्री राम शर्मा आचार्य ने विकास के चरण को निम्न मॉडल से दर्शाया है....
व्यैक्तिक विकास------>> पारिवारिक विकास------>> सामाजिक विकास------>> राष्ट्र विकास
व्याख्या स्पष्ट है की व्यक्ति से परिवार से जुड़ा है...परिवारों से समाज जुड़ा है...समाज से राष्ट्र और और फिर राष्ट्र से हर एक नागरिक से जुड़ा है....!! इसलिए शुरुवात खुद की अपने प्रति जिम्मेदारी से करें, अगर इसमें सफल हो गए तो यकीन माने की आगे की राह आपकी सोच से कहीं अधिक सरल होगी. ये भी एक विडम्बना है की इस सरलता को छोड़कर हम जिंदगी भर एक कभी न खत्म होने वाले संघर्ष में लगे रहते है...सभी के प्रति ईमानदारी दर्शाने में लगे रहते है...परिवार को झूठी ख़ुशी देने में लगे होते है....!! इसलिए सबसे पहले
खुद के प्रति जिम्मेदार रहे...ईमानदार बने ...
कभी न सूखने वाला हार बने....!!
क्यों की "अब मैं नहीं हम"
Friday, April 22, 2011
हिंदुस्तान में केवल हिन्दुओं की अनदेखी क्यों....?
ये लेख किसी धर्म या समाज के खिलाफ नहीं है, ये कांग्रेस की घटिया राजनीती का एक छोटा सा आइना है
गुजरात के पूर्व IPS अधिकारी संजीव भट्ट का 9 साल बाद नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आया बयाँ (मोदी ने बाकायदा बैठक बुलाकर आदेश दिया था कि मुसलमानों के खिलाफ सख्ती से पेश आओ। उन्हें सबक सिखाओ ताकि साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने जैसी घटना दोबारा न हो सके) उन् सभी हिन्दू समर्थक नेताओं, संतो, और संगठनो के खिलाफ एक षड़यंत्र है जो हिन्दुस्तान को मूल स्वभाव से हिन्दुस्तान देखना चाहते है और यहाँ ये सवाल खुद सत्तारूढ़ देश विरोधी कांग्रेस सरकार से पूछना लाजिमी है की जिन्होंने 250 से ज्यादा हिन्दुओं को सिर्फ साम्प्रदायिकता के चलते जिन्दा जला दिया क्या उनको दंड भी न दिया जाए और अगर दंड देने की वो प्रक्रिया गैरकानूनी थी तो इसकी जिम्मेदार खुद सरकार है जिसने खुद ही अपना विश्वास न्याय व्यवस्था पर से खो दिया है, अब देश की जनता तुरंत न्याय चाहती है, या तो सरकार देश हित को सर्वोपरि रखकर सम्प्रादियकता से बचते हुए न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए खुद कुछ ठोस कदम उठाये नहीं तो जनता तख्ता पलट करने में जयादा समय नहीं लेगी...!! मुसलमान दुश्मन नहीं है पर उनके बीच में बैठे असामाजिक तत्वों का कांग्रेस वोटो की राजनीति के चलते जिस तरह बचाव करती है वो निंदनीय और हिन्दुओं के लिए असहनीय है, और साथ ही देश के भविष्य के लिए नासूर..!! ऐसे में भारतीय राजनीती में भविष्य केवल उन्ही लोगों का है जो धर्मनिरपेक्षता पर यकीन रखते हुए भारत की राजव्यवस्था का नेतृत्व करेंगे....!!
सब धर्म है एक समान - जय हिंद- जय भारत- जय हिंदुस्तान
We Youth Foundation - "Us is Better Than I"
Friday, February 18, 2011
~~भारत पर सियासी शतरंज का साया~~
मनमोहन सिंह...!! ये वही नाम है जिसने 90 के दशक में भारत की जर्जर हो चुकी आर्थिक स्थति को न केवल मजबूत किया बल्कि पूरे विश्व पटल का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.....ये वो नाम है जिसने राजनीति में अपने को चमकाने के लिए लोकसभा क्षेत्रों में उतारकर लोगो की भावनाओं से खिलवाड़ और झूठे वादे करके नहीं बल्कि अपनी इमानदार छवि के आधार पर प्रधानमंत्री के स्तर पर पहुंचा ....ये वो नाम है जो दुनिया के नामचीन अर्थशास्त्रियों में शुमार है....ये वो नाम है जिसने अमेरिका के साथ परमाणु संधि करके पूरे विश्व जगत में हलचल मचा दी थी.....ये वो नाम है जो बाईपास सर्जरी कराकर भी 120 करोड़ लोगो की उम्मीदों का बोझ अपने काँधे पर लादे हुए है.....फिर आखिर ऐसी कौन सी बात है की इतने मजबूत कंधे अपने ही देश में इतने कमजोर नज़र आते है..!!
लगातार खुलते घोटालों के राज.....भ्रष्टाचार में सलिंप्त लोगो की लम्बी होती सूची....महंगाई से कराहती आम जनता.... गरीबों का सड़ता अनाज...उस पर हमारे कृषि मंत्री जी के सबसे घटिया और बेशर्मी से भरे बयाँ.....और सब जानते हुए भी मनमोहन सिंह जी के ऊट पटांग जवाब..तर्कहीन तथ्य...!! क्या ये सब बातें साफ़ साफ़ ये इशारा नहीं करते की वाकई में मनमोहन सिंह एक चाबी के खिलोने की तरह ही काम कर रहे है..!! और कांग्रेस के सत्ताकाल में ही मनमोहन सिंह जी जैसे व्यक्तित्व के प्रधान मंत्री पद पर रहते हुए सरकार के लगातार गिरते हुए स्तर के बावजूद प्रधानमंत्री का प्रेस कांफेरेंस बुलाकार अपनी मजबूरी का इजहार करना सिर्फ एक ही इशारा करता है भारत के राजनैतिक महकमे में सियासी शतरंज में गठबंधन में जुडी मतलबी पार्टिया इस तरह से अपने मोहरों कि बिसात बिछाएं बैठे है कि बात सह और मात पर टिकी हुई है...उसके बावजूद भी बेशर्मी से सरकार चलाना कोई आसान बात नहीं है...आखिर इस सह और मात में कौन सी पार्टिया है भारत के जनता के लिए नासूर..और किन मजबूरियों ने बांधे है सरकार के हाथ....
राज खुलने को बाकी है कुछ लम्हों का इंतजार....बस इंतजार करे अगले शब्दों से भरे एक लेख का....To Be Continued
Friday, January 7, 2011
हमारे युवा यानी 50 करोड़ बिजलीघर..
ये नए एंग्री यंगमैन होंगे...। वे प्रश्न पूछेंगे...। तीखे प्रश्न...। कक्षाओं में...। सड़कों पर...। सभासदों से...। मठाधीशों से...। सारी दुनिया से...। अज्ञान खत्म करने के लिए...। भय-मुक्त होने के लिए...। खुले-खिले रहने के लिए...। वे, अकर्मण्य चर्चाओं से परे रहेंगे...। तयशुदा, रटे-रटाए ‘भारत विरुद्ध इंडिया’ जैसे फलसफों को सिरे से नकार देंगे..। उनके पास ऐसे ‘निकृष्ट’ विषयों के लिए समय कहां होगा..? क्योंकि उन्हें पता है कि 7 जन्मों के पुण्यों के फल से भारतीय होने का गौरव मिलता है।
कहीं से आया कोई बच्चा नई दिल्ली हवाई अड्डे पर पंचतंत्र की कहानियों की मांग करते दिख जाए तो चकित न हों। समझ लीजिए कि वह जापानी राजधानी के मिताका इलाके से आया है। वहां पर भारतीय किताबों से पढ़ाई शुरू की गई है जो अब कई स्कूलों में चल रही है। और ऐसा किसी फैशनेबल प्रयोग के लिए नहीं किया गया है।
सन 2000 में जापान गणित की पढ़ाई में विश्व में सर्वश्रेष्ठ था, 3 वर्ष पहले दसवें क्रम पर फिसल गया। भारी बहस के बाद शुरू की र्गई भारतीय किताबें। कक्षाओं में पंचतंत्र की कहानियां होने लगीं और उसके पशु-पात्र सिंहनक और दमनक के चित्र लगाए गए।
गणित के लिए तो साफ कहा गया कि औसत जापानी बच्चे 9 तक ही पहाड़े सीख पाते हैं, जबकि भारतीय बच्चे 99 का पहाड़ा खूब सुना देते हैं- 99 में 99 का गुणा तेजी से करते हैं। तेज गति। तेज बुद्धि। यही तो है हिंदुस्तान की विशेषता। इसी के भरोसे हम विश्व में शीर्ष होंगे। स्वतंत्रता की 50वी सालगिरह पर इंद्रकुमार गुजराल ने गजब का उदाहरण दिया था।
उन्होंने बताया था कि0 "50 साल पहले उनका परिवार रेल्वे प्लेटफार्म पर सोता था - आज वे प्रधानमंत्री हैं। यानी समान अवसर। ऐसा सिर्फ हिन्दुस्तान में हो सकता है। अब समय आ गया है। 115 करोड़ का 10 वर्षों से गुणा करने का..! क्योंकि यह दशक हमारा है। हर भारतीय का..। और इस दशक में ही तय होगा कि हमारा देश सुपरपावर बनेगा.। चाहे बने कभी भी।
तय अभी ही होगा..। और सर्वाधिक कीमती समय है "2011"...!! क्योंकि यह इस स्वर्णिम दशक का आधार वर्ष है। सूझबूझ वाले लोग सुबह देखकर बता देते हैं कि दिन कैसा होगा..। हमारे लिए नया वर्ष नए दशक की भोर ही है। पौ फटने पर जागना होता है। हमें जागना ही तो है। शेष काम तो सूर्य का है। चमचमाती किरणों से इतनी ऊर्जा भर देगा कि हर पल, हर जीवन रोशनी से भर उठेगा।
इसी ऊर्जा के सही प्रयोग की बारी आ गई है। दशक का नेतृत्व युवा करेंगे। हमारे युवा यानी कोई 50 करोड़ बिजलीघर। चलते-दौड़ते और उड़ते ऊर्जा मंडल। ये युवा अब तक की पीढ़ियों में सबसे जुदा होंगे। इनके तेवर में ताप होगा। इनके सीने में आग होगी। उन्हें किसी सांसारिक सफलता की परवाह नहीं होगी।
क्योंकि मातृभूमि का गौरव जो बढ़ाना है। नृत्यांगना सोनल मानसिंह ने कहा था "सात जन्मों के पुण्य से भारत में जन्म होता है । अगले दस वर्ष महिलाओं के नाम होंगे। युवा वर्ग मिलकर जहां अमीर-गरीब के भेद को पाट देगा, महिलाओं को इससे भी बड़ा श्रेय मिलेगा। वे दिखा देंगी कि शहरी और ग्रामीण महिलाओं में सांसारिक <span>संघर्षों</span> लेकर कोई अंतर नहीं है।
दमन को कुचलने और बाधा बने तत्वों को मुंहतोड़ जवाब देने में जितना साहस शहरी युवतियां दिखाएंगी उतना ही गांव की महिलाएं। और एक बड़ा परिवर्तन आने वाला है। अभिशाप बनकर बैठी निरक्षरता नष्ट होने जा रही है। जितनी अमेरिका की कुल आबादी है उससे कहीं अधिक भारतीय पढ़ नहीं सकते। इसलिए आगे नहीं बढ़ सकते।
सभी ने यह सुना..। किंतु बड़ी भूल की..। ऐसा कड़वा सुनकर भी हम पढ़ने में नहीं जुटे..? पास होने में ही संतुष्ट हो गए..। संतुष्ट होना- किसी भी देश के युवाओं का संतुष्ट हो जाना- पतन की पताका फहराने जैसा है। वह तो हमारे बुजुर्र्गो का प्रताप रहा कि हमारा पतन नहीं हुआ।
उधर एक बड़ी भूल की हमारे शिक्षकों ने भी। उन्होंने हमें कभी पढ़ाई करने को नहीं उकसाया। नहीं समझाया कि अक्षर ज्ञान होने पर ही विश्व का नेतृत्व मिल सकेगा। ऐसी कमजोर पढ़ाई के बावजूद नासा, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल, आईबीएम और जीरॉक्स- में भारतीयों की संख्या 25 से 28 प्रतिशत है। यह प्रतिशत बढ़ भी जाए तो कोई महान विषय नहीं है। नए युवा को, नई महिला को न कोई डिग्री डिगा पाएगी न पद लुभा पाएंगे।
उसका कोई ‘आयकन’ नहीं होगा। उसे राहुल गांधी पसंद तो आएंगे किंतु रोल मॉडल नहीं होंगे। सचिन, सानिया, साइना से वह प्रभावित होगा लेकिन बस खेल तक। फिल्मी सितारे, राजदुलारे हों या चांद सितारे- वह उन्हें उनकी दक्षताओं-क्षमताओं तक ही पसंद करेगा।
उसे पता होगा कि किसी को भी रोल मॉडल बनाने से उसे ‘उनके जैसा’ बनना होगा- स्वयं का अस्तित्व खोना पड़ेगा। फिर यह समय उसका कैसे होगा? यह दशक शौर्य का चरमोत्कर्ष होगा।विजयी वही होंगे जो मंजिल नहीं, राहों से प्रेम करेंगे। कहा गया है कि : यदि आप कमजोर पैदा हुए हैं- तो इसमें आपका कोई दोष नहीं किंतु यदि कमजोर ही मरते हैं- तो पूरे दोषी आप ही हैं।...
"We Youth Foundation" जनवरी 2011 से इसी लक्ष्य के साथ भारत और विश्व के समन्वित नैतिक, भौतिक और अध्यात्मिक विकास के साथ संकल्पित होकर आप लोगो के बीच आया है.. आप सभी से इस महतवपूर्ण विकाशात्मक आन्दोलन में हाथ से हाथ मिलकर जुड़ने की अपील है.. ताकि हर घने अँधेरे को दिए से दिया जलाकर दूर किया जा सके..!! विश्वास रखे कि ये आने वाला दशक इतिहास में युवाओं को भविष्य का मार्गदर्शक बतायेगा... क्यों कि आने वाले दशक का युवा "अब मैं नहीं हम" के सांचे से ढला होगा..और इस सांचे को मजबूत आधार देने के लिए आज ही "We Youth Foundation" के महत्वपूर्ण स्तम्भ बने..!! आज ही 9871117901 या 9368015620 पर कॉल करे..!!
Friday, December 31, 2010
नए वर्ष 2011 की शुभकामनायें...
बीत गए वो लम्हे सारे...बीत गए वो दिन....
कुछ हँसते खेलते बीते..कुछ तारे गिन गिन
सोचा कि आखिर क्या है ये "वर्षों" का आना जाना
जिसके गम और और खुशियों में डूब जाता है ज़माना
तो हर बार ज़हन में निकाल कर आई एक ही बात...
.....कि जो 'आज' है.. वही बीता हुआ कल भी है और आने वाला भी कल
और इसी कल पर ही टिका है सबकी उम्मीदों का भार...
इसी भार को हल्का कर पहुंचे
सभी के पास हमारी आशाओं और प्यार का उपहार..
....इसी भाव के साथ महसूस हो रहा है
"नए साल का आगाज़"
~~मुबारक हो...मंगलमय हो....और हर पल का मनुहार को
आप सभी का नए वर्ष 2011 में सबसे सुखी संसार हो..~~
सूर्य प्रकाश शर्मा
अध्यक्ष
"We Youth Foundation"
9871117901
Wednesday, December 29, 2010
एक भावभरी अपील
(परिवर्तित).....कृपया इसे जरूर पढ़े
परमात्मा की प्रेरणा से समाज के कुछ प्रतिष्ठित महानुभावों और "We Youth Foundation" के कुछ सशक्त युवाओं के सम्मल्लित सहयोग से 6 जनवरी 2011 को 2 गरीब कन्याओ का विवाह कराया जा रहा है...इस महान कार्य के सफल संचालन में आप सभी मित्रों का आशीर्वाद उन कन्याओं के जीवन के लिए संजीवनी साबित होगा...जो भी लोग इस महान कार्य में अपनी ओर से कन्यादान देना चाहे ya इस कार्यक्रम से जुड़ी अधिक जानकारी या निमंत्रण पत्र पाना चाहें तो 9871117901 या 9368015620 पर कॉल करे या अपनी फेसबुक पर सन्देश के माध्यम से अपनी E-mail ID भेजें..
निवेदक- सूर्य प्रकाश शर्मा, अध्यक्ष, "We Youth Foundation
Monday, December 27, 2010
"We Youth Foundation" ..... ~~युवा जोड़ो अभियान~~
"We Youth Foundation"
युवा जोड़ो अभियान
~~युवा जाग्रति बनाम राष्ट्र जाग्रति~~
देश की 54 % तरुणाई शक्ति तरुण राष्ट्र
"स्वर्णिम इतिहास अभी तक का केवल यही बतलाता है कि...
जिस और जवानी जाती है, उस और ज़माना जाता है !!"
अत: देश कि 54 % तरुण शक्ति को अपने गौरवमयी इतिहास का बोध करा
व्यक्ति, परिवार, समाज एवं राष्ट्र निर्माण में नियोजित करना होगा
इसी हेतु
~~~राष्ट्र के कर्णधारों के नैतिक , बौद्धिक एवं सांस्कृतिक जागरण का रचनात्मक अभियान~~~
*सरंक्षक एवं प्रेरणास्रोत*
पूज्य गुरुदेव पं. श्री राम शर्मा आचार्य
*अध्यक्ष*
सूर्य प्रकाश शर्मा
9871117901
9368015620
*मुख्य सलाहकार*
डॉ. रचना विमल, प्रवक्ता - दिल्ली विश्वविधालय
श्री विनोद कुमार शर्मा, प्रोजेक्ट हेड - नेटप्रोफेट्स ग्लोबल
श्री प्रह्लाद प्रसाद शर्मा, समाजसेवी
श्री अनिल सप्रे जी, भोपाल
श्री गोविन्द राम बोहरा, राजस्थान
श्री गोविन्द राम बोहरा, राजस्थान
Sunday, December 26, 2010
कैसा भारत स्वाभिमान..
कुछ लोग मुझे आजकल ऐसे मिलते है जो भारत स्वाभिमान की बात करते है ..पर देखकर और जानकार हैरान होता हूँ कि वो लोग खुद की कही हुई बातों पर ही सच्चाई से अनजान है...और जब कभी भी उनसे उन्ही के पहलुओं पर कुछ भी व्यवहारिक सच्चाई की बात करो तो उनके मुहं पर ताला लग जाता है...और वो बिना कुछ गए फिर से धुंध की तरह धुंधले होकर चले जाते है...जय हो भारत स्वाभिमान..
स्वाभिमान के सच्चे व्यवहारिक पहलुओं से जुड़ने के लिए अब जागे और आज ही "We Youth Foundation" ज्वाइन करने के लिए 9871117901 या 9368015620 पर कॉल करें...
क्यों की विरोध से विद्रोह...विद्रोह से अशांति और अशांति से विनाश का जन्म होता है,,,इसका वर्तमान उदाहरण राजस्थान है..
तो आओ फिर आज से ही एक शांत और सुन्दर भारत के निर्माण के लिए संकल्पित हो...
क्यों कि
"अब मैं नहीं हम"
Thursday, December 23, 2010
सरकार और देश का विरोधी बनकर देशभक्ति का गुणगान - समझ से परे
पिछले कई दिनों से मैं अपने एक सर्वे में लगा था, सर्वे इस बात का कि आखिर भारत में कुछ लोग, कुछ संगठन, कुछ राजनैतिक पार्टियां इत्यादि किन विदेशी वस्तुओं का बहिस्कार करने का आम जनता का आह्वान करते है, सुबह शाम, हर पल अपनी बातों में गीता के उदाहरानो से लोगो को अपने प्रभाव में खींचने वाले लोगो को क्या इतनी बात भी समझ में नहीं आती कि गीता का सार ही "वसुधैव कुटुम्बकं" कि सूक्ति से बंधा है....ऐसे में क्या देशी और क्या विदेशी...और अपने इन्ही प्रश्नों का जवाब लेने के लिए मैंने बहुत से युवाओं से प्रत्यक्ष और बहुत से युवाओ से फैसबुक के माध्यम से बात कि ...पर दुःख ही हुआ कि अभी उनके आधार हिन् तर्क थे..और आने वाले समय में उनका अपने ही देश से विद्रोह पनपेगा....और मुझे सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा कि जो युवा भारत के सहयोगी बन सकते है, उनको आधारहीन और देश कि सरकार के विरुद्ध एक हथियार बनाकर इस्तेमाल करने कि शीत योजना चल रही है....!!
ऐसे मैं उन सब युवाओ से अपनी बात शुरू करने से पहले एक बात ये कहना चाहूँगा कि...अपने देश में रहने वाले ऐसे किसी भी व्यक्ति, पनपने वाले किसी भी व्यवसाय या लागू होने वाली किसी भी ऐसी योजना , जिसकी अनुमति सरकार ने काफी विचार करने के बाद दी हो, उनका विरोध करना देश भक्ति नहीं हैं बल्कि हम देश को भविष्य के सन्दर्भ में एक और आतंरिक विद्रोह का दूरगामी अवसर दे रहे है.
चलिए अब हम युवाओं से हुई ढेरसारी बातों का विश्लेषण करने की और चलते है...और इसका निर्णय वे सभी लोग करें जो भी इस लेख को पढ़ें, और सोचें कि आने वाला भारत ऐसे संगठनो के साथ आगे बढ़कर स्वर्णिम होगा या "We Youth Foundation" की स्वयं निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण की योजनागत तरीके से तैयार कि गई विकासात्मक नीतियों के साथ...
अपने इस सर्वे की शुरुआत मैं सभी से एक प्रश्न के माध्यम से करता था, कि आखिर वो समाज कार्य से क्यों जुड़े, कोई भी एक सेमीनार या सामाजिक कार्य का हिस्सा बनकर आप क्या महसूस करते है, और इसका जवाब भी सभी से एक जैसा ही मिलता, जीमे कोई कहता कि उनको कि उन्हें अच्छा महसूस होता है और कोई कहता कि उन्हें आतंरिक संतुष्टि मिलती है, पर इसके बाद जिन प्रश्नों का जो सिलसिला शुरू होता वही से भ्रम का मायाजाल भी शुरू होता, और अनुमान होता था कि ये भी सरहद पार चल रहे आतंकवादी शिविर से कम नहीं है.
उनसे पुछा गया की वो विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को क्यों ठीक समझते है...तो किसी का जवाब मिला कि एम् .एन.सी कम्पनीयां भारत को लूटने में लगी है, किसी ने कहा कि कोका कला कम्पनीयों के पेय मानक ठीक नहीं है, किसी ने कहा कि कोलगेट कंपनी के उत्पाद ठीक तरीके से नहीं बने हुए, और किसी ने कहा कि खेती में विदेशी तकनीकी के फर्टीलाईज़र का इस्तेमाल मिटटी को कमजोर कर रहा है...इसलिए भारत सरकार से आरपार की लड़ाई करने का इरादा है..
अब अगर हम इन् बेतुकी बातो कि थोड़ी सी चीड फाड़ करे तो स्थिति बिलकुल स्पष्ट हो जाती है कि आखिर ये युवा अपनी ही सरकार के बेवजह विरोधी बनकर देश द्रोही बनने कि ओर अग्रसर है.. क्यों कि जिन एम्.एन.सी कंपनी का लोग विरोध करने और करने को भीड़ जोड़ रहे है आज उन्ही एम्.एन.सी कंपनी कि वजह से हम दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो पाएं है, इसके लिए उन्हें 1990 में आये आर्थिक पतन का विश्लेष्ण करना चाहिए....
अब दूसरी बात आती है कि कोका कोला या कोलगेट जैसी कम्पनीयों के मानक...इसके लिए सरकार या कम्पनीयां नहीं बल्कि जनता खुद दोषी है , क्यों कि सरकार हमारी ही जेब से इकठ्ठे किये गए रुपये में से करोड़ो सिर्फ इसलिए खर्च करती है जिसमे ये प्रचार होता है कि कोई भी चीज़ ISI mark देखकर ख़रीदे...तो फिर हम उसे खरीदते ही क्यों है , क्यों नहीं उसको बंद करने के लिए सरकार पर दबाव डाला जाता. न्यायालय के दरवाजे सभी के लिए एक बराबर खुले है, बशर्ते कि क्रातिकारी शुरुवात को पैसो के बल से शान्ति से न दबा दिया जाए.
उसके बाद अगर खेती में विदेशी फर्टीलाईज़र कि बात करे तो इसका जवाब हमारे खुद के ही पास है, इसके लिए जरा गौर करने वाली बात ये है कि सरकार पिछले 50 सालो से भारत कि जनता से आग्रह करती आई है कि 'हम दो हमारे दो'....पर फिर भी आज हमारी जनसँख्या 50 सालों में 30 करोड़ से 1 अरब हो गई..जिसकी वजह से खेती कि ज़मीन पर घर बनाने के कारण खेती की जगह कम होती जा रही है और जनसँख्या बढ़ती जा रही है, ऐसे में अगर लोगो की जरूरतें पूरी न हो तो फिर सरकार दोषी...आखिर कब तक अपनी कमियों को भूलकर दूसरो पर दोष लगते रहेंगे..
अब सबसे ज्यादा ताज्जुब तो मुझे तब हुआ जब विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार करने वाले इन् संगठनो से जुड़े लोगो की जीवन शैली, आश्रम और कार्यालयों का मैंने सर्वे किया, क्यों कि वहां एल. जी का ए.सी लगा था, घुमने के लिए टोयोटा कि गाड़ी थी, बाथरूम में सेनिटरी हुकाची की थी, सबके हाथ में मोबाइल नोकिया का था, मतलब हर तरफ विदेशी वस्तुओं की चमक धमक ...फिर भी पता नहीं क्यों हमारे युवा इन् बातों को नज़रंदाज़ कर अंधी भीड़ में शामिल होकर जुड़ते चले जाते है...
और इसके विपरित इतिहास गवाह है की भारत में हमेशा सबको गले लगाकर अपनाया गया है, इसी कारण हमारा भारत सभी देशो में सबसे महान माना जाता है और अपने इसी स्वभाव के ज़रिये ही पूरा विश्व भारत को आने वाले समय का विश्वगुरु की संज्ञा दे चुका है... और भी बहुत सी बातें इस सर्वे में निकल कर आई जिनका अगले लेख में जिक्र और समाधान किया जाएगा....बस एक बात जो सभी युवाओ से "We Youth Foundation" के माध्यम से आपको एक सन्देश के तौर पर कहनी है वो ये की " विरोध से विद्रोह पनपता है, विद्रोह से अशांति का जन्म होता है और अशांति से केवल विनाश होता है" गीता भी यही कहती है "वासुदेव कुटुम्भकम " और वैसे भी विद्रोह करके किसी का सहयोग नहीं पाया जा सकता इसके लिओये खुद से तपना पड़ता है...और वही ताप क्रांति और इसी क्रांति से परिवर्तन की इबादत लिखी जाती है...."
इस लेख से जुड़े किसी भी समाधान को स्पष्ट करने के लिए या अगले लेख से जुडी भी किसी भी जिज्ञाषा के लिए कभी भी 9871117901 या 9368015620 पर कॉल करें या surya.dsvv@gmail.com पर मेल भेजें.... देश और विश्व के सुनहरे भविष्य के लिए आज ही "We Youth Foundation" का हिस्सा बने...
उनसे पुछा गया की वो विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को क्यों ठीक समझते है...तो किसी का जवाब मिला कि एम् .एन.सी कम्पनीयां भारत को लूटने में लगी है, किसी ने कहा कि कोका कला कम्पनीयों के पेय मानक ठीक नहीं है, किसी ने कहा कि कोलगेट कंपनी के उत्पाद ठीक तरीके से नहीं बने हुए, और किसी ने कहा कि खेती में विदेशी तकनीकी के फर्टीलाईज़र का इस्तेमाल मिटटी को कमजोर कर रहा है...इसलिए भारत सरकार से आरपार की लड़ाई करने का इरादा है..
अब अगर हम इन् बेतुकी बातो कि थोड़ी सी चीड फाड़ करे तो स्थिति बिलकुल स्पष्ट हो जाती है कि आखिर ये युवा अपनी ही सरकार के बेवजह विरोधी बनकर देश द्रोही बनने कि ओर अग्रसर है.. क्यों कि जिन एम्.एन.सी कंपनी का लोग विरोध करने और करने को भीड़ जोड़ रहे है आज उन्ही एम्.एन.सी कंपनी कि वजह से हम दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो पाएं है, इसके लिए उन्हें 1990 में आये आर्थिक पतन का विश्लेष्ण करना चाहिए....
अब दूसरी बात आती है कि कोका कोला या कोलगेट जैसी कम्पनीयों के मानक...इसके लिए सरकार या कम्पनीयां नहीं बल्कि जनता खुद दोषी है , क्यों कि सरकार हमारी ही जेब से इकठ्ठे किये गए रुपये में से करोड़ो सिर्फ इसलिए खर्च करती है जिसमे ये प्रचार होता है कि कोई भी चीज़ ISI mark देखकर ख़रीदे...तो फिर हम उसे खरीदते ही क्यों है , क्यों नहीं उसको बंद करने के लिए सरकार पर दबाव डाला जाता. न्यायालय के दरवाजे सभी के लिए एक बराबर खुले है, बशर्ते कि क्रातिकारी शुरुवात को पैसो के बल से शान्ति से न दबा दिया जाए.
उसके बाद अगर खेती में विदेशी फर्टीलाईज़र कि बात करे तो इसका जवाब हमारे खुद के ही पास है, इसके लिए जरा गौर करने वाली बात ये है कि सरकार पिछले 50 सालो से भारत कि जनता से आग्रह करती आई है कि 'हम दो हमारे दो'....पर फिर भी आज हमारी जनसँख्या 50 सालों में 30 करोड़ से 1 अरब हो गई..जिसकी वजह से खेती कि ज़मीन पर घर बनाने के कारण खेती की जगह कम होती जा रही है और जनसँख्या बढ़ती जा रही है, ऐसे में अगर लोगो की जरूरतें पूरी न हो तो फिर सरकार दोषी...आखिर कब तक अपनी कमियों को भूलकर दूसरो पर दोष लगते रहेंगे..
अब सबसे ज्यादा ताज्जुब तो मुझे तब हुआ जब विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार करने वाले इन् संगठनो से जुड़े लोगो की जीवन शैली, आश्रम और कार्यालयों का मैंने सर्वे किया, क्यों कि वहां एल. जी का ए.सी लगा था, घुमने के लिए टोयोटा कि गाड़ी थी, बाथरूम में सेनिटरी हुकाची की थी, सबके हाथ में मोबाइल नोकिया का था, मतलब हर तरफ विदेशी वस्तुओं की चमक धमक ...फिर भी पता नहीं क्यों हमारे युवा इन् बातों को नज़रंदाज़ कर अंधी भीड़ में शामिल होकर जुड़ते चले जाते है...
और इसके विपरित इतिहास गवाह है की भारत में हमेशा सबको गले लगाकर अपनाया गया है, इसी कारण हमारा भारत सभी देशो में सबसे महान माना जाता है और अपने इसी स्वभाव के ज़रिये ही पूरा विश्व भारत को आने वाले समय का विश्वगुरु की संज्ञा दे चुका है... और भी बहुत सी बातें इस सर्वे में निकल कर आई जिनका अगले लेख में जिक्र और समाधान किया जाएगा....बस एक बात जो सभी युवाओ से "We Youth Foundation" के माध्यम से आपको एक सन्देश के तौर पर कहनी है वो ये की " विरोध से विद्रोह पनपता है, विद्रोह से अशांति का जन्म होता है और अशांति से केवल विनाश होता है" गीता भी यही कहती है "वासुदेव कुटुम्भकम " और वैसे भी विद्रोह करके किसी का सहयोग नहीं पाया जा सकता इसके लिओये खुद से तपना पड़ता है...और वही ताप क्रांति और इसी क्रांति से परिवर्तन की इबादत लिखी जाती है...."
इस लेख से जुड़े किसी भी समाधान को स्पष्ट करने के लिए या अगले लेख से जुडी भी किसी भी जिज्ञाषा के लिए कभी भी 9871117901 या 9368015620 पर कॉल करें या surya.dsvv@gmail.com पर मेल भेजें.... देश और विश्व के सुनहरे भविष्य के लिए आज ही "We Youth Foundation" का हिस्सा बने...
To Be Conitnue.....
क्यों कि
"अब मैं नहीं हम"
क्यों कि
"अब मैं नहीं हम"
Sunday, December 5, 2010
यह होता है इंसान में भगवान का अंश
आज की खबर में जाना की दुनिया भर के करीब 650 अरब लोगों में से कुछ चुनिन्दा अमीर लोगों में शुमार भारत के हर दिल अजीज ~"अजीज़ प्रेम जी"~ ने शिक्षा के क्षेत्र में विश्वव्यापी सुधार लाने के लिए 9 हज़ार करोड़ रूपए का दान दिया. उनकी इस क्रांतिकारी और ऐतहासिक पहल से एक नए भारत की इबारत लिखा जाना तो तय हो गया है. क्यों की किसी भी देश के सुनहरे भविष्य के नीव बच्चों के भविष्य पर ही निर्भर करती है, अगर कुछ और ऐसे लोग भारत के भविष्य निर्माण में एक कदम आगे बढ़ा दें तो सच में वो दिन दूर नहीं जब हर घर में शिक्षा होगी और हर मोहल्ले में स्कूल.
जय हिंद - जय भारत
क्यों की
"अब मैं नहीं हम"
Thursday, October 28, 2010
कब तक की ये ख़ामोशी है...
कभी जुबां खामोश है तो कभी लब नहीं खुलते मेरे.!!
कभी रिश्ते खामोश है तो कभी अपने नहीं होते मेरे..!!
कभी कल्पना खामोश है तो कभी लफ्ज़ नहीं होते मेरे..!!
कभी मन खामोश है तो कभी ज़ज्बात नहीं होते मेरे..!!
कभी हम खुद से खामोश है तो कभी सपने भी नहीं होते मेरे..!!
भला....
अब पूछे भी किससे कि क्यों है ये ख़ामोशी सी...
और क्यों ख़ामोशी के बेहद करीब ये एहसास है मेरे....
इतनी भीड़ में तन्हाई क्यों है......
इतनी भीड़ में तन्हाई क्यों है,
हर दिल-ए-अजीज में गहराई क्यों है,
क्यों होता है हर महफ़िल में रुखसत का एहसास,
हर पल गुनगुनाती सी ये खामोश सहनाई क्यों है,
आखिर इतनी भीड़ में भी तन्हाई क्यों है.
Monday, September 20, 2010
कॉमनवेल्थ गेम्स- मुसीबतों का पिटारा भाग - 2
आज यानी 20 सितम्बर से शुरू हो जायेगी इन्द्र देवता की बरसात और कॉमनवेल्थ के लिए शुरू की गयी ब्लू लेन की प्रतिस्प्रधता की नयी जंग की BISAAT ... ?? इस पर एक दिन पहले ही जामा मस्जिद पर हुए एक बचकाने हमले से उड़ी हुई दिल्ली पुलिस की नींद के मद्देनज़र अब ये देखना और भी दिलचस्प होगा कि आखिर भ्रष्टाचार के शिखर तक अपने जमीर को गिराने वाली कॉमनवेल्थ आयोजन समिति के कथन "खेलों के सफल आयोजन को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है"..और अपने विज्ञापनो में "सदैव आपके लिए" का दम भरने वाली दिल्ली पुलिस को आने वाले एक महीने में कितनी हकीकत और कितनी खोकले वादे निकल कर आते है...??
Saturday, September 11, 2010
आखिर कब तक.......
लाल बहादुर शास्त्री (स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री) ने समृद्ध भारत के लिए एक सूत्र दिया था...
"जय जवान-जय किसान"
.....पर किसान आज तक भी कर्ज के बोझ के तले दबे आत्महत्या कर रहा है, और जवान बेवजह आतंकवादी, नक्सली, और उग्रवादी हमलो में मारे जा रहे है.
Sunday, September 5, 2010
कॉमनवेल्थ गेम्स- मुसीबतों का पिटारा भाग - 1
कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के दौरान खास खेल में शिरकत करने वाले मेहमानों और खिलाडियों के आवाजाही के इस्तेमाल के लिए बनाई गयी ब्लू लेन का कल शनिवार 4 सितम्बर 2010 को ट्रायल हुआ, और ये ट्रायल दिल्लीवासियों के लिए 20 सितम्बर से 20 अक्टूबर तक कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान पहली कुर्बानी की ओर एक इशारा था...!! इस लेन में प्रवेश करने का मतलब है सीधे आपकी जेब से 2000 रूपैय छू मंतर...और साथ ही घर से ऑफिस और ऑफिस से घर पहुँचने के लिए एवेरेस्ट पर चढ़ने जैसी मसक्कत. ....पर कहीं ऐसा तो नहीं की ये कलमाड़ी जी का कॉमनवेल्थ गेम्स पर लगी राशि निकालने का नया फार्मूला हो.. क्यों कि लगभग 3 करोड़ की जनसँख्या और हर रोज़ सड़कों पर लगभग 40 लाख से ज्यादा वाहन का झेलने वाली वाली दिल्ली में ये नियम कितना कारगर हो पायेगा, इसके लिए यहाँ बताने की नहीं बल्कि गेम्स के बाद ट्रफिक व्यवस्था के उन चालानों को खंगालने की जरूरत है जो केवल ब्लू लेन के लिए काटे गए है. पर "कहें भी क्या और करें भी क्या" जब हमारी पब्लिक ही खामोश है तो भला हम लोकतंत्र के अपराधी क्यों बने. पर हम सब अपना फ़र्ज़ निभाकर अंतिम साँस तक लोगो की अंतरात्मा को जगाने के लिए काम करते रहे, क्यों की ये देश हमारा है...!!
ये थी हमारी कॉमनवेल्थ गेम्स पर जनहित के लिए पहली पेशकश..!! आगे और भी बहुत कुछ कर रहा है आपका इंतजार.....!! क्यों कि .....
अब मैं नहीं "हम"
Profile of an Achiever
Failed in Business, Bankruptcy – 1831
Defeated in Legislature – 1832
Failed in Business Bankruptcy – 1834
Sweet Heart, Finance Dies – 1835
Nervous Breakdown – 1836
Defeated in Election – 1838
Defeated in U.S Congress – 1843
Defeated again US congress – 1846
Defeated in US senate – 1855
Defeated for US vice president – 1856
Defeated again for US senate – 1858
ABRAHAM LINCOLN
elected president ofUSA – 1860
elected president of
“You Can not Fail until You quit”
Sunday, August 29, 2010
Tuesday, July 20, 2010
कहानी पूरी फ़िल्मी है.. ..
~~गांधी गिरी~~
सूर्य प्रकाश और गाँव के एक चौधरी में बातचीत
सूर्य प्रकाश : हुक्का मोय पकड़ा के चौधरी फिर सिरीयस हो गयो...मन्न पूच्छा का होगो तमै..!!
चौधरी : के करूँ....नाचू थारे गैल...तमै तो नाचनो भी ना आवे ठीक ते...!!
सूर्य प्रकाश : तू इतना सिरीयस क्यों से चौधरी...नू बता...!!
चौधरी : मैं एक फिलम बनाना चाहूं सूं..पर स्टोरी के खातिर थारे धोरे भीख मांगने की कोई जरूरत नो.., घणी चौखी स्टोरी है म्हारे धोरे..!!!
सूर्य प्रकाश : मन्ने माथा पीट ली...तुमने लिखी फिलम की स्टोरी..? या अल्लाह सिनेमा हॉल पे रहम करना..!!
<चौधरी बिगड़ जाता है>
चौधरी : मोय पत्तो है...अक तमै मेरे तलेंट ते घणी जलन से...पे इब के फिलम बना के ही मानूंगो...!!
सूर्य प्रकाश : चोरी को खतरों ना हो तो मन्ने भी सुना दे अपनै फिलम की स्टोरी...!!
चौधरी : त़ा सुण पर बीच बीच में टोकियो मत..!!
<चौधरी ने कहानी शुरू की>
"एक गरीब गाम से..वा गाम में एक गरीब माँ.और गैल वा काअ छोरा रह से...!! माता जी कू सदियों पुराणी खांसी की बीमारी से...अजुर छोरे ने फर्स्ट क्लास में पास होने की...!! दोनों को कोई इलाज नो.."
सूर्य प्रकाश : लै बीच बीच में हुक्को पीतो रह...!!चौधरी : परे कर हुक्के नै....बीच में बोल के मेरी कहानी कू भटका मत...रीमैक का या ज़माना में म्हारी फिल्म बिलकुल असली से...!! आगे सुण...!!
"गाम में एक सूदखोर लाला आर एक जालिम ज़मींदार सै....गैल एक बाँध भी सै...जा मई सदियाँ ते काम चल रहा सै..!"
सूर्य प्रकाश : लेकिन यूं बता चौधरी की अक हर फिलम में गाम के धोरे बाँध ही क्यों बनता रह सै..!!चौधरी : जिससे गाम की बहु बेटियों कू अपनी इज्जत बचान की खातिर ज्यादा दूर ना भग्नो पड़े..!!
सूर्य प्रकाश : और आस पास कड़ी थानों भी नज़र ना आवे...!!
चौधरी : ज़मींदार के होते थानेदार की काह जरुरत..!!
सूर्य प्रकाश : हाँ भई बर्बाद गुलिस्तान कू बस एक ही उल्लू काफी है...
<चल कहानी सुण>
चौधरी : "गरीब माँ को गरीब छोरा एक दिन अमीर ज़मींदार की शहर ते लौटी छोरी कू देख लेता सै..बस फिर वेह सारे काम छोड़ के हीरोइन के गैल 'आल्हा' गाने लाग्या .!!सूर्य प्रकाश : फिर के होया..
चौधरी : ज़मींदार ने हीरो की माता जी कू ठाके शेर के बाड़े में डाल दई...!! माता जी कू खांसता देख शेर बोल्या- दुखी मत हो माई..आज मन्ने रोजे रखे है..इब्बी इफ्तखार तक तम्मे कोई खतरा नो...!!
फिर माई बोली - हम्बे तब तक तो हीरो आ जा गा...!!
फिर माता जी कू बचाने की खातिर हीरोइन शेर के बाड़े में कूद गयी..!!
शेर बोल्या : इफ्तखार में अभी आधा घंटा बाकी सै...आप दोनों कौ बहूत बहूत शुक्रिया..!!
माई बोली : हीरो कित मर गयो...!!
हीरोइन बोली : तू क्यों बावला हो रया सै....अभी तो रोजा खोलने में तीस मिनट बाकी सै...
खैर इतनी देर में हीरो बाड़े कौ छत से रस्सी लै के कूदो..!! और दोनों कू ठाके छत से झूलने लाग्या..!! तब शेर ने हीरो से रिक्वेस्ट करी...भाई आज मेरे धोरे रोजा खोलने कू एक भी खजूर नो...तेरे धोरे दो दो है...एक मन्ने दे दे ठाकुर...!! हेरोइन को टपका देना ना...!!
तभी माता जी कू खांसी का दौरा पड़ा...आर वा काउ खांसता देख शेर चिल्लाया : मोय इन्फेक्सन ते बचा लो...मन्ने नहीं खाना खजूर...माता जेई नू खांसी की दावा दो..आर मन्ने एक गिलास पानी..!! मौ पै रहम कर माई...!!
<शेर की गांधीगिरी देखकर ज़मींदार को हृदय परिवर्तन हो गयो>
दी एंड
Monday, July 19, 2010
वफाओं का सिला...!!
वो शख्श जब से गया फिर कभी मिला नहीं,
ऐसा बुझा चिराग मेरा आज तक जला नहीं.
ज़माना इस दस्तूर को कहता है बेवफाई,
मगर मुझे उस शख्श से कोई गिला नहीं.
खुल गया दरवाज़ा मेरी ये कैसी हवा चली,
पेड़ों का तो एक भी पत्ता हिला नहीं.
जाने कैसा हो गया फिजाओं का दस्तूर आज,
एक कली भी मुस्काई नहीं एक फूल भी खिला नहीं.
सारे जाने से वफ़ा की ए तुने "सूर्य प्रकाश"
क्या ये सब तेरी वफाओं का सिला तो नहीं.
"अब मैं नहीं हम"
"अब मैं नहीं हम"
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